Friday, July 11, 2014

सागौन का जंगल

कलम से _ _ _ _

30th June, 2014

सागौन के
ऊँचे ऊँचे
दरख्त,
शहर से दूर बहुत।

शोरगुल
हवाऔं का,
टकराते पत्तों का,
यदाकदा
चीतल
पुकारता
जंगल का राजा
है, आस पास कहीं,
यह दर्शाता।

देखने को जिसको
खुले वन में,
मनुष्य दूर से है आता,
नजर वह फिर भी
किस्मत वालों से ही मिलाता।

पहली बारिश में,
जगंल से उठती
सोंधी सी सुगंध से,
मन मेरा डोल डोल जाता।

इस अहसास के जीने को,
मन मेरा बार बार करता।

(यह कविता लिखते समय मेरे दिल दिमाग पर टिकरी का जगंल छाया हुआ था)
 — withRam Saran Singh and 44 others.
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  • Suresh Chadha Sir ji suprabhat
    Tikkri ka jangal b kafi manmohak hae hum sab ne Mankapur rehte hue bahut bar njoy kiya ..lekin waha sher nahi.mila
    Sikriya purani yado ko fir se yad dilane ke liye
    Ati uttam rachna hae ye
  • Rajan Varma 'इस एहसास के जीने को, मन बार बार करता'- बहुत खूब; इसे संयोग ही कहिये कि आज आप ने इस रचना का सृजन किया अौर आज ही हम सपरिवार अफ़रीकन लाॅयन सफ़ारी, (टोरेंटो) देख़ने गये अौर वहाँ जंगल के राजा (कम से कम बीस शेर तो होंगे) मद-मस्त, अलसाये से इधर-उधर सो रहे थे- आँख तो फ़िर भी नहीं मिला पाये परन्तु दृश्य मन-भावन था; सही में इस एहसास को बार-बार जीने का मन करता रहेगा
  • S.p. Singh दिल से दिल जुडते हैं
    ऐसे वाकया होते रहते हैं।

    मुझे याद रहेगी सदा यह छोटी सी कविता जिसने इतनी दूरी पल में पूरी की।
    बहुत अच्छा लगा।
  • Sanjay Joshi यदा कदा 
    चितल पुकारता, 
    जंगल के राजा है 
    पास कहीं 
    यह दर्शाता.... 
    क्या बात है सर,, बहुत खूब..
    See Translation
  • S.p. Singh धन्यवाद जोशी जी।
  • Ram Saran Singh बड़ा सुंदर लग रहा है छायाचित्र । साथ में जंगल का राजा और सघन वन । क्यों नहीं करेगा मन जाने को बार- बार । बढ़िया महोदय । अनेक रूखी- सूखी रचनाएँ मिलती हैंं लेकिन यहाँ तो आँखों को तर करती हरियाली है ।
  • S.p. Singh बहुत खूब व्याख्या की है। हरियाली की बात तो अति सुन्दर लगी।
    धन्यवाद सिहं साहब।
  • Ajay Jain Sabhi bandh var ko namaskar
  • Sp Tripathi आनन्द तो पूरी कविता पढ़ने में आया । लेकिन अंन्तिम लाइन आते ही परमानन्द की अनुभूति हुई । प्रशंसा के लिये शब्द नहीं है ।See Translation
  • आशीष कैलाश तिवारी अच्छा हुआ आप ने बता दिया कि कहां के जंगल में घूम रहे हैं। मैं बान्धवगढ़ का जंगल सोचा रहा था!See Translation
  • Janardan Pandey Ati sundar chitran
  • Javed Usmani बहुत सुंदरSee Translation
  • S.p. Singh आप सभी मित्रों का मैं आभारी हूँ और कविता पसंद आई यह मेरा सौभाग्य है।
    भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग मिलने की उम्मीद करता हूँ।

    धन्यवाद।
  • BN Pandey MERE PAAS LIKHANE KO SHUBD LOGO NE CHHORA HI NAHI HAI. ESILIYE MAINE UN COMMENTS KO LIKE KER DIYA JISASE MILATE -JULATE HAMARE BHAAV THE. VERY NICE
  • S.p. Singh पाडें जी, 
    आप हमारे वह चमकते सितारे हैं जो शून्य से भी सब कुछ पैदा कर लेते हैं।

    शुक्रिया आपका।
  • BN Pandey SIR AAP KI HAUSALA- AFAZAAHI HUME SONE NAHI DEGI.
  • Bhawesh Asthana बहुत सुन्दर ,बहुत खूब
  • SN Gupta जंगल का राजा और सागौन के पेड़ -प्राकृतिक सुंदरता से भरी पंक्तियाँ
  • Dhiraj Kumar nice....wah
  • Prem Prakash Goswami इस अहसास के जीने को,
    मन मेरा बार बार करता।
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  • Kanahiya Lal Mishra ESE sunder vicar kana se aate hai. Likhane ko man karta hai achar nahi mil pate hai .
  • Madhvi Srivastava nature is the beautifulgift of god

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