26-06-2014
मेरी छोटी सालीसा इंदु की भावभीनी श्रद्धांजली श्रीकांत जी को, जिनका निधन गत 14 जून, 2014 दिन शनिवार को आचानक ह्रदय गति रुक जाने के कारण हो गया था:-
नया परिवेश जिया,
तुमको कहके अपना पिया,
छोड बीच मझदार गये तुम,
पूछूँ मैं तुमसे,
ऐसा तुमने क्यों किया ?
नहीं मालूम था,
बीच मझधार में ऐसे
छोड़ चले जाओगे
कह दोगे
लो पतवार संभालो
अपनी नैया तुम खुद खेओ
बोलो तुम बिन कैसे
चले जीवन की ये नैया
नहीं, बस अब और नहीं,
सह पाऊँगी,
रंग विहीन जीवन,
तुम बिन जी न अब पाऊँगी।
मन रूठा, तुम क्यों रूठे
रंग बेरंग हो गये सब,
मनवा टूट गया है,
सब्र छूट रहा है,
नहीं, बस अब और नहीं,
सह पाऊँगी।
कहूं अगर मैं तुमसे,
पास आना है मुझे मिलन को तुमसे,
मना न कर देना,
बस हां भर कह देना मनसे,
आ जाऊंगी मैं अपने मनसे,
नहीं, बस अब और नहीं,
सह पाऊँगी।
रीत निभानी पडती है जग की
रंग नहीं सिंदूर नही
सब छोडा है
जीने के लिए
नहीं, बस अब और नहीं
सह पाऊँगी। — with Ramaa Singh and Shreya Singh Raghuvanshi.
मेरी छोटी सालीसा इंदु की भावभीनी श्रद्धांजली श्रीकांत जी को, जिनका निधन गत 14 जून, 2014 दिन शनिवार को आचानक ह्रदय गति रुक जाने के कारण हो गया था:-
नया परिवेश जिया,
तुमको कहके अपना पिया,
छोड बीच मझदार गये तुम,
पूछूँ मैं तुमसे,
ऐसा तुमने क्यों किया ?
नहीं मालूम था,
बीच मझधार में ऐसे
छोड़ चले जाओगे
कह दोगे
लो पतवार संभालो
अपनी नैया तुम खुद खेओ
बोलो तुम बिन कैसे
चले जीवन की ये नैया
नहीं, बस अब और नहीं,
सह पाऊँगी,
रंग विहीन जीवन,
तुम बिन जी न अब पाऊँगी।
मन रूठा, तुम क्यों रूठे
रंग बेरंग हो गये सब,
मनवा टूट गया है,
सब्र छूट रहा है,
नहीं, बस अब और नहीं,
सह पाऊँगी।
कहूं अगर मैं तुमसे,
पास आना है मुझे मिलन को तुमसे,
मना न कर देना,
बस हां भर कह देना मनसे,
आ जाऊंगी मैं अपने मनसे,
नहीं, बस अब और नहीं,
सह पाऊँगी।
रीत निभानी पडती है जग की
रंग नहीं सिंदूर नही
सब छोडा है
जीने के लिए
नहीं, बस अब और नहीं
सह पाऊँगी। — with Ramaa Singh and Shreya Singh Raghuvanshi.

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