कलम से____
27th June, 2014
दो रोज पहले हमारे मित्र श्री राजन वर्मा जी ने इल्तिजा की थी कि उनके लिए मैं कुछ कहूँ।
उनका आदेश मान कर एक छोटी सी कोशिश की है। आशा है पसंद आएगी।
शब्द, मुहावरे इत्यादि वही इस्तेमाल किए गए हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी के अभिन्न अंग हैं। मेरी यह तुच्छ भेंट उनके नाम है।
________________________________
समय थोडा है, काम जरूरी है,
मौका यही है, मगर फिर भी फुरसत नहीं है,
कहना यह ठीक नहीं है,
काम तुम्हारे हैं, तुम्हें ही निपटाने हैं,
चैन पाओगे, जब काम सब निपट जाएगें ।
मौके की तलाश में रहो,
मौके हजार आएगें,
क्या तुम्हें करना है, यह याद दिलाएंगे,
भूल करोगे, तो पछताओगे,
राम जी के शरणागत हो जाओ,
काम बिगडे सब बन जाएगें।
फुरसत में चैन की बंसी बजे,
हर दिन मौसम एकसा रहे,
ऐसा कहां होता है,
आखिर होता है,
वही जो मंजूरे खुदा होता है।
सल्तनत खुदा की कुबूल करो,
अल्लाह के बनाए उसूलों पर चलो,
भगवान भी तुम्हारा हो जाएगा,
जो अब तक तुम्हारा न हुआ है,
वो भी तुम्हारा हो जाएगा। — with आशीष कैलाश तिवारी and 50 others.
27th June, 2014
दो रोज पहले हमारे मित्र श्री राजन वर्मा जी ने इल्तिजा की थी कि उनके लिए मैं कुछ कहूँ।
उनका आदेश मान कर एक छोटी सी कोशिश की है। आशा है पसंद आएगी।
शब्द, मुहावरे इत्यादि वही इस्तेमाल किए गए हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी के अभिन्न अंग हैं। मेरी यह तुच्छ भेंट उनके नाम है।
________________________________
समय थोडा है, काम जरूरी है,
मौका यही है, मगर फिर भी फुरसत नहीं है,
कहना यह ठीक नहीं है,
काम तुम्हारे हैं, तुम्हें ही निपटाने हैं,
चैन पाओगे, जब काम सब निपट जाएगें ।
मौके की तलाश में रहो,
मौके हजार आएगें,
क्या तुम्हें करना है, यह याद दिलाएंगे,
भूल करोगे, तो पछताओगे,
राम जी के शरणागत हो जाओ,
काम बिगडे सब बन जाएगें।
फुरसत में चैन की बंसी बजे,
हर दिन मौसम एकसा रहे,
ऐसा कहां होता है,
आखिर होता है,
वही जो मंजूरे खुदा होता है।
सल्तनत खुदा की कुबूल करो,
अल्लाह के बनाए उसूलों पर चलो,
भगवान भी तुम्हारा हो जाएगा,
जो अब तक तुम्हारा न हुआ है,
वो भी तुम्हारा हो जाएगा। — with आशीष कैलाश तिवारी and 50 others.

No comments:
Post a Comment