कलम से-----
दिल को लग गया है एक अजीब रोग,
ला इलाज हो गया है कहते कुछ लोग,
इल्म तुम्हें है या नहीं जानता मै नहीं,
हो सके तो आजाना मिलने तनहाई मे कहीं।
मिल बैठ दो एक बात करेगें,
कुछ अपनी कहेंगे कुछ उनकी सुनेंगे,
वक्त यूं ही गुजर जाएगा,
ले जाना है उसे जब ले जाऐगा।
चिंता करना छोड दे,
जो होना है अब हो जाने दे। — with आशीष कैलाश तिवारी and 41 others.
दिल को लग गया है एक अजीब रोग,
ला इलाज हो गया है कहते कुछ लोग,
इल्म तुम्हें है या नहीं जानता मै नहीं,
हो सके तो आजाना मिलने तनहाई मे कहीं।
मिल बैठ दो एक बात करेगें,
कुछ अपनी कहेंगे कुछ उनकी सुनेंगे,
वक्त यूं ही गुजर जाएगा,
ले जाना है उसे जब ले जाऐगा।
चिंता करना छोड दे,
जो होना है अब हो जाने दे। — with आशीष कैलाश तिवारी and 41 others.

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