Friday, July 11, 2014

चिंता अजीब रोग

कलम से-----

दिल को लग गया है एक अजीब रोग,
ला इलाज हो गया है कहते कुछ लोग,
इल्म तुम्हें है या नहीं जानता मै नहीं,
हो सके तो आजाना मिलने तनहाई मे कहीं।

मिल बैठ दो एक बात करेगें,
कुछ अपनी कहेंगे कुछ उनकी सुनेंगे,
वक्त यूं ही गुजर जाएगा,
ले जाना है उसे जब ले जाऐगा।

चिंता करना छोड दे,
जो होना है अब हो जाने दे।
 — with आशीष कैलाश तिवारी and 41 others.
Photo: कलम से-----

दिल को लग गया है एक अजीब रोग,
ला इलाज हो गया है कहते कुछ लोग,
इल्म तुम्हें है या नहीं जानता मै नहीं, 
हो सके तो आजाना मिलने तनहाई मे कहीं।

मिल बैठ दो एक बात करेगें,
कुछ अपनी कहेंगे कुछ उनकी सुनेंगे, 
वक्त यूं ही गुजर जाएगा,
ले जाना है उसे जब ले जाऐगा।

चिंता करना छोड दे,
जो होना है अब हो जाने दे।

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