Friday, July 11, 2014

पूजा का थाल

यह दिनांक 19-05-2014 को लिखी गई थी, पोस्ट करने का अवसर न मिला। आज आपकी सेवा में प्रस्तुत है।

कलम से----

विस्मित हूँ,
भयावह हूं,
प्रार्थना करता हूँ,
आज दृष्टि गोचर जो हुआ है,
पुनः न दिखे,
पूजा का थाल बिखरा न मिले।

पूजा का थाल कभी बिखरा न मिले।

मैं तो नतमस्तक था,
नमन दिन प्रतिदिन करता था,
पुष्प और जल हर रोज चढा जाता था,
मेरा विश्वास क्यो टूटा है?

भगवन, आपने आज ऐसा क्या किया है?

विश्वास टूटता है,
स्वपन बिखर जाते है,
आस्था के प्रश्न उठ जाते है,
जीवन ठगा-ठगा सा लगता है,
प्रश्न मेरा है तुझसे, ऐसा क्यों होता है?

पास आओ मेरे,
बैठो यहां पल दो पल,
शून्य में खो जाओ,
देखो कुछ दिखता है?

अधंकार घोर,
अंधकार है भगवन यहां,
हे तात,
इसी अंधकार से जीवन फिर उगता है,
जा जीवन जी ले,
जा सब कुछ वह करले,
जो करना है, कर ले,
लक्ष्य सभी जीवन के हासिल कर ले।

जा जीवन जी ले।

जा जीवन तू जी ले।
 — with Ram Saran Singh and 46 others.
Photo: यह दिनांक 19-05-2014 को लिखी गई थी, पोस्ट करने का अवसर न मिला। आज आपकी सेवा में प्रस्तुत है।

कलम से----

विस्मित हूँ,
भयावह हूं,
प्रार्थना करता हूँ,
आज दृष्टि गोचर जो हुआ है,
पुनः न दिखे,
पूजा का थाल बिखरा न मिले।

पूजा का थाल कभी बिखरा न मिले।

मैं तो नतमस्तक था,
नमन दिन प्रतिदिन करता था,
पुष्प और जल हर रोज चढा जाता था,
मेरा विश्वास क्यो टूटा है?

भगवन, आपने आज ऐसा क्या किया है?

विश्वास टूटता है,
स्वपन बिखर जाते है,
आस्था के प्रश्न उठ जाते है,
जीवन ठगा-ठगा सा लगता है,
प्रश्न मेरा है तुझसे, ऐसा क्यों होता है?

पास आओ मेरे,
बैठो यहां पल दो पल,
शून्य में खो जाओ,
देखो कुछ दिखता है?

अधंकार घोर,
अंधकार है भगवन यहां, 
हे तात, 
इसी अंधकार से जीवन फिर उगता है,
जा जीवन जी ले,
जा सब कुछ वह करले,
जो करना है, कर ले,
लक्ष्य सभी जीवन के हासिल कर ले।

जा जीवन जी ले।

जा जीवन तू जी ले।

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