Saturday, July 12, 2014

हादसा मंडी

कलम से _ _ _ _ _ _

25th June, 2014

उन बच्चों के नाम जो मंडी के पास हिमाचल में नदी के बहाव में कुछ रोज पहले अचानक बह गए और चले गए।

मैं, मेरी पोती, धर्मपत्नी
और मेरे एक दोस्त
ठीक एक महीना पहले
उसी जगह से गुजर रहे थे
जहां ये बच्चे बह गए
मै उनींदा सा हो रहा था
कान में आवाज पडी
ड्राइवर गाडी तो जरा रोको
मैने पूछा क्या हुआ भाई
श्रीमती जी कह रहीं थीं
नीचे नदी में उतरना है
चंद फोटो खींचेगें
फिर आगे बढेंगें
झांक कर मैने देखा
द्रश्य बहुत मनोहारी था
न जाने क्यों
मेरा मन नहीं मान रहा था
डर मन भीतर बैठा था
कर दिया मना
नहीं कोई जरूरत
नद में नीचे जाने की
है ये पहाडी नदी
आ जाती है
मुश्किल अचानक बहुत बडी।

जानता था
न आई थी
पसंद मेरी सलाह
फूल गया था चेहरा
मेरी श्रीमती जी का
दोस्त मेरे कहने लगे
चलिए मैं चलता हूँ
मैनें जोर देकर कहा
नहीं कोई नहीं जाएगा
चलो आगे चलें
हमें अभी दूर बहुत जाना है।

टैक्सी आगे बढ चली
और बात आई गई सी हो गई।

कुछ दिन बाद अचानक
फोन की घंटी जब बजी
मेरे दोस्त ने बताया
दो दर्जन बच्चे बह गए
ठीक उसी जगह
जहां
किसी को न जाने दिया था, वहां।

सुन खबर
मै स्तब्ध रह गया
न जाने
कितनों का घर उजड गया
कभी कुछ ऐसा हो जाता है
जीवन भर याद रह जाता है।

चले जो गए
लौट न आएगें कभी
बस याद बहुत आएगें
बस याद बहुत आएगें________
 — with आशीष कैलाश तिवारी and 46 others.
Photo: कलम से _ _ _ _ _ _

25th June, 2014

उन बच्चों के नाम जो मंडी के पास हिमाचल में नदी के बहाव में कुछ रोज पहले अचानक बह गए और चले गए।

मैं, मेरी पोती, धर्मपत्नी 
और मेरे एक दोस्त
ठीक एक महीना पहले
उसी जगह से गुजर रहे थे
जहां ये बच्चे बह गए 
मै उनींदा सा हो रहा था
कान में आवाज पडी
ड्राइवर गाडी तो जरा रोको
मैने पूछा क्या हुआ भाई
श्रीमती जी कह रहीं थीं
नीचे नदी में उतरना है
चंद फोटो खींचेगें
फिर आगे बढेंगें
झांक कर मैने देखा
द्रश्य बहुत मनोहारी था
न जाने क्यों 
मेरा मन नहीं मान रहा था   
डर मन भीतर बैठा था
कर दिया मना
नहीं कोई जरूरत
नद में नीचे जाने की
है ये पहाडी नदी
आ जाती है 
मुश्किल अचानक बहुत बडी।

जानता था 
न आई थी 
पसंद मेरी सलाह
फूल गया था चेहरा 
मेरी श्रीमती जी का
दोस्त मेरे कहने लगे 
चलिए मैं चलता हूँ
मैनें जोर देकर कहा 
नहीं कोई नहीं जाएगा
चलो आगे चलें
हमें अभी दूर बहुत जाना है।

टैक्सी आगे बढ चली
और बात आई गई सी हो गई।

कुछ दिन बाद अचानक
फोन की घंटी जब बजी
मेरे दोस्त ने बताया
दो दर्जन बच्चे बह गए
ठीक उसी जगह 
जहां 
किसी को न जाने दिया था, वहां।

सुन खबर 
मै स्तब्ध रह गया 
न जाने 
कितनों का घर उजड गया 
कभी कुछ ऐसा हो जाता है
जीवन भर याद रह जाता है।

चले जो गए 
लौट न आएगें कभी
बस याद बहुत आएगें
बस याद बहुत आएगें________
  • Rajani Bhardwaj oooooooooooooooohhhhhhh.marmantak
  • Ram Saran Singh सुनकर मन दुखी हुआ था । भावी सपनों पर क्रूर तुषारापात हो गया । परंतु इन पर किसका वश । घर उजड़ गए । बड़ा ही हृदय विदारक ।
  • Suresh Chadha Kisi ke jane ke bad maan to bahut dukhi hota hae 
    Sirf yade baki reh jati hae . ..RNP jane balo ke liye
  • S.p. Singh आप सभी का धन्यवाद कि आप बच्चों के परिवार जन के दुख में शरीक हुए।
  • Rajan Varma हादसा बेहद दर्दनाक व दुर्भाग्यपूर्ण था- परन्तु ईश्वर की मर्ज़ी के आगे इन्सान का वश नहीं चलता- ग़र चलता तो शायद बड़े-बड़े महाबली अौर इच्छा-मृत्यू का वरदान पाने वालों की कभी मौत नहीं होती; बचपन में संतों-महत्माअों के सत्संग में जाने अौर सुनने का बहुत शौक था- तभी किसी महात्माँ के प्रवचनों में सुना था, कि- जब इन्सान जन्म लेता है, उसकी मृत्यू कब, कहाँ अौर कैसे होनी है- तभी निश्चित हो जाता है; उनके द्वारा कही निम्न-लिखित चार पंक्तियाँ दिल में घर कर गई थीं, अौर य़दा-कदा ज़हन में उभर कर मनुष्य जीवन के मूल लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये प्रेरित करती रहती हैं-
    समय थोड़ा है,
    काम ज़रूरी है;
    मौका यही है,
    मगर फ़िर भी फ़ुरसत नहीं है ।
    सर मेरी आपसे प्रार्थना है कि उक्त विचारों को आप अपने सशक्त हस्ताक्षर तले, अपने अनोखे अंदाज़ में re-phrase कर अपने मित्र-मंडली अौर शुभ-चिंतको हेतू fb पर प्रकाशित कर दीजिये- शायद किसी के मानस-पट्टल पर स्थाई-अस्थाई प्रभाव छोड़ने में सफ़लता मिल जाये- संतो का संदेश जहाँ तक पहुँचे; इसे मेरी फ़रमाइश समझ लीजिये
  • S.p. Singh आपने अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर कुछ कहा है। अवश्य पूरा करने की कोशिश करूंगा।

    इतने सुंदर विचार व्यक्त किए गए हैं कि मैं उसके वहाव में बहता ही जा रहा हूँ।
    बहुत धन्यवाद।
  • Rajan Varma धन्यवाद सर- मुझे यही लगता है कि मैं कहीं अलग दिशा में तो discussion नहीं मोड़ देता ?
  • S.p. Singh नहीं वर्मा जी नहीं।
    विचार को अविरल बहने दीजिए।ज्ञान की गंगा तभी बहेगी।
  • BN Pandey AS PER GREAT PHILLOSOPHER LAURENCE PETER A "PESSIMIST" IS A MAN WHO LOOKS BOTH WAYS BEFORE CROSSING A ONE WAY STREET. SIR AAP EK KAVI HAI AUR KAVI "BHAVISHY - DRUSHTA " HOTA HAI. AAP SAMAY KE ANUSAAR APANA NIRNAY LEKER AAGE BARH GAYE. ......YOUNGESTER OVER ENTHUISM HOTE HAI .......JO BHI HUA AAP KO MAINE BATAAYA THA KI 02 DIN MAI DISTURB RAHA ESILIYE AAP KE POST KA UN DINO KOI JABAAB TUK NAHI DIYA. HUM SUB KE BACHCHE BHI BAHAR HAI . HUME TO SAARE BACHCHE EK JAISE HI DIKHATE HAI. MAI APANI PEERA KO AUR LIKHUNGA TO BHAVNAYE JABAAB DE JAAYENGI. AAJ BHI HUM BHULE NAHI HAI. .......AAP KI RACHANA EK SAHI SHRADHANJALI.
  • Ajay Jain Ese hadso pe bhi dhyan rakhne ki jaroorat he --bachho ke mata pita se aagrah he ki esi activity ke samay vo khud jaye ji----pani life ka jeevan he aur dushman bhi
  • Javed Usmani मर्मस्पर्शी , जिन्हे जाना था चले गए,सिर्फ उनकी याद बाकी है, दुनिया पहले जैसे ही चल रही है, समय रहते सतर्कतावश आगाह करा दिया जाता तो शायद बच्चो की समय मृत्यु नहीं होतीSee Translation
  • SN Gupta मार्मिक ,साथ ही इसे कहते हैं प्रत्युत्पन्न मति
  • Ajay Jain vese bhi ese spot pe bhejna me avoid karna chahiye akele ji
  • Gian Chand Pawar अजय जी आप बिलकुल सही हैं सब को इस हादसे बहुत अफसोश हैं पर आज कल के बच्चे मानते नहीं हैं माता पिता को साथ जाना उचित नहीं समझते क्यों की कम्पनी नहीं मिलती हैं, हमारा आपका समय कुछ और ही था जो माता पिता को तवज्जो दी जाती थी रचना अच्छी हैं सिंह साहब की
  • S.p. Singh धन्यवाद मित्रों।
  • Ajay Jain Dhanyvad Pawar ji ---esa ek bhi insan aaj nahi he jo apne bachho se khush ho antrang se but kah nahi pata ku ki bachhe ki burai karne se apni hi burai hoti he ya bachha gussa karega ji--- Amoonann esa ho raha he dear----
  • Baba Deen · Friends with Bagga Sk and 19 others
    YUG PARIWARTAN HAI
  • Sanjay Joshi Oh my god,,,
  • Gian Chand Pawar युग परिवर्तन का खामियाजा मात पिता को ही सहना पड़ता हैं वैसे आज के युग में मॉडर्न मात पिता भी हैं
  • Ajay Jain esa kesa Yug parivartan ji bhad me jaye ek din jaroor aayega jab ye hi ma bap yad aayenge ji aur ek ek bat pe afsos zahir karenge ji---kahavat he ki lot ke buddhu ghar pe aaye----
  • Sp Tripathi इसे दुस्साहस कहना ज़्यादा उचित होगा । दुस्साहस का परिणाम सदैव कष्टकारी होता हैSee Translation
  • S.p. Singh पहाड़ों में बारिश की शुरूआत हो चुकी है। जो महानुभाव वहां हैं अथवा जाने की सोच रहे हैं क्रपया ध्यान दें कि वहां की नदियों में अचानक बाढ आई सकती है। इसलिए नदी की तलहटी में न जाएं।
    धन्यवाद।
    June 26 at 5:31am · Edited · Like · 3
  • Shashi Shekhar Prasad इस हादसे मे कुछ बच्चे बच भी गये, और कुछ दूसरों को बचाते हुए बह भी गए. राजन वर्मी जी की टिपणी बहुत सार्थक है.
  • Madhvi Srivastava very painful..............
  • Himanshu Mahla बेहद दर्दनाक व दुर्भाग्यपूर्ण,,,,,See Translation

No comments:

Post a Comment