कलम से _ _ _ _ _ _
25th June, 2014
उन बच्चों के नाम जो मंडी के पास हिमाचल में नदी के बहाव में कुछ रोज पहले अचानक बह गए और चले गए।
मैं, मेरी पोती, धर्मपत्नी
और मेरे एक दोस्त
ठीक एक महीना पहले
उसी जगह से गुजर रहे थे
जहां ये बच्चे बह गए
मै उनींदा सा हो रहा था
कान में आवाज पडी
ड्राइवर गाडी तो जरा रोको
मैने पूछा क्या हुआ भाई
श्रीमती जी कह रहीं थीं
नीचे नदी में उतरना है
चंद फोटो खींचेगें
फिर आगे बढेंगें
झांक कर मैने देखा
द्रश्य बहुत मनोहारी था
न जाने क्यों
मेरा मन नहीं मान रहा था
डर मन भीतर बैठा था
कर दिया मना
नहीं कोई जरूरत
नद में नीचे जाने की
है ये पहाडी नदी
आ जाती है
मुश्किल अचानक बहुत बडी।
जानता था
न आई थी
पसंद मेरी सलाह
फूल गया था चेहरा
मेरी श्रीमती जी का
दोस्त मेरे कहने लगे
चलिए मैं चलता हूँ
मैनें जोर देकर कहा
नहीं कोई नहीं जाएगा
चलो आगे चलें
हमें अभी दूर बहुत जाना है।
टैक्सी आगे बढ चली
और बात आई गई सी हो गई।
कुछ दिन बाद अचानक
फोन की घंटी जब बजी
मेरे दोस्त ने बताया
दो दर्जन बच्चे बह गए
ठीक उसी जगह
जहां
किसी को न जाने दिया था, वहां।
सुन खबर
मै स्तब्ध रह गया
न जाने
कितनों का घर उजड गया
कभी कुछ ऐसा हो जाता है
जीवन भर याद रह जाता है।
चले जो गए
लौट न आएगें कभी
बस याद बहुत आएगें
बस याद बहुत आएगें________ — with आशीष कैलाश तिवारी and 46 others.
25th June, 2014
उन बच्चों के नाम जो मंडी के पास हिमाचल में नदी के बहाव में कुछ रोज पहले अचानक बह गए और चले गए।
मैं, मेरी पोती, धर्मपत्नी
और मेरे एक दोस्त
ठीक एक महीना पहले
उसी जगह से गुजर रहे थे
जहां ये बच्चे बह गए
मै उनींदा सा हो रहा था
कान में आवाज पडी
ड्राइवर गाडी तो जरा रोको
मैने पूछा क्या हुआ भाई
श्रीमती जी कह रहीं थीं
नीचे नदी में उतरना है
चंद फोटो खींचेगें
फिर आगे बढेंगें
झांक कर मैने देखा
द्रश्य बहुत मनोहारी था
न जाने क्यों
मेरा मन नहीं मान रहा था
डर मन भीतर बैठा था
कर दिया मना
नहीं कोई जरूरत
नद में नीचे जाने की
है ये पहाडी नदी
आ जाती है
मुश्किल अचानक बहुत बडी।
जानता था
न आई थी
पसंद मेरी सलाह
फूल गया था चेहरा
मेरी श्रीमती जी का
दोस्त मेरे कहने लगे
चलिए मैं चलता हूँ
मैनें जोर देकर कहा
नहीं कोई नहीं जाएगा
चलो आगे चलें
हमें अभी दूर बहुत जाना है।
टैक्सी आगे बढ चली
और बात आई गई सी हो गई।
कुछ दिन बाद अचानक
फोन की घंटी जब बजी
मेरे दोस्त ने बताया
दो दर्जन बच्चे बह गए
ठीक उसी जगह
जहां
किसी को न जाने दिया था, वहां।
सुन खबर
मै स्तब्ध रह गया
न जाने
कितनों का घर उजड गया
कभी कुछ ऐसा हो जाता है
जीवन भर याद रह जाता है।
चले जो गए
लौट न आएगें कभी
बस याद बहुत आएगें
बस याद बहुत आएगें________ — with आशीष कैलाश तिवारी and 46 others.

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