Saturday, July 12, 2014

पोखर, किनारे!

कलम से______

24th June. 2014

आ चल पोखर,
किनारे बैठेगें,
छपक छपैया खेलेंगें,
पहली गिट्टी तू फैंक,
मै फैकूंगां बाद री,
चल फैंक गिट्टी फैंक।

तीन छपैया हुईं रे,
यह देख मेरी जाती कितनी दूर,
पांच बार हुई रे,
तू जीता मै गई हार रे।

तेरी जीत में है ही मेरी जीत,
हम हैं जो एक दूजे के मीत।

आ लहरों पर अपना अपना नाम लिखें,
किस्मत के खेलों को अपने नाम करें।
 — with Ram Saran Singh and 44 others.
Photo: कलम से______

24th June. 2014

आ चल पोखर,
किनारे बैठेगें,
छपक छपैया खेलेंगें,
पहली गिट्टी तू फैंक,
मै फैकूंगां बाद री,
चल फैंक गिट्टी फैंक।

तीन छपैया हुईं रे,
यह देख मेरी जाती कितनी दूर,
पांच बार हुई रे,
तू जीता मै गई हार रे।

तेरी जीत में है ही मेरी जीत,
हम हैं जो एक दूजे के मीत।

आ लहरों पर अपना अपना नाम लिखें,
किस्मत के खेलों को अपने नाम करें।

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