Friday, July 11, 2014

जगंल का राजा

कलम से _ _ _ _

8th July, 2014

बारिश की पहली बूंदों से है जंगल में गहमा गहमी,
उमस हो रही बहुत है नहीं हुई है नरमा नरमी।

दूब हरी होने को उत्सुक पल्लव का रंग भी बदला नही हैं,
माटी गीली नहीं हुई है सौधीं बयार भी अभी बही नहीं है।

माहौल ठीक नहीं है मानसून परेशानी का सबब बना हुआ है,
चेहरों पर खुशियां नहीं है आशाएँ बिखरी पडी हैं।

चितिंत है राजा जंगल का बुलाया है दरबार,
आओ मिल बैठें, करें कुछ सोच विचार,
करना है क्या क्या, चर्चा हो विस्तार,
ढांचागत सुधार आवश्यक हैं बाकी सब बेकार।

जंगल की सुरक्षा का प्रश्न अहम है,
ढील ढाल न हो किसी प्रकार की यह अति आवश्यक है,
करना है इस पर हम सबको अवश्य विचार,
विचार विमर्श पश्चात ही हो योजना तैयार।

दिया आदेश राजा ने यह सब समझ लें,
सुरक्षा को मजबूत करना प्राथमिकता है हम सबकी,
वन सुरक्षित हम सुरक्षित भूलचूक न हो किसी तरह की,
दोस्तों,
वन सुरक्षित रहेगे, तभी हम सब सुखी रहेगें,
जनहित का यह सबाल महत्वपूर्ण बहुत है,
भूल न जाना इसमें सबका उपकार निहित है।

(From today Union Budget excersize would begin.)



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