कलम से _ _ _ _
7th July, 2014
एक नीम अपने आगंन हो, होती है इच्छा सबकी,
कुछ की पूरी होती, रह जाती है कुछ की आधीअधूरी।
कलुआ जाटव का आंगन खाली है
एक पेड नीम का हो इच्छा भारी है।
विरवा होगा तो चिडियां भी आएंगीं,
जीवन की आशाएँ पूरी हो जाएंगी।
नीम नीचे खाट बिछा सोने में लगता अच्छा है,
नीदं आए गहरी और मजा खूब आता है।
उधार किस किस का कब कब देना है,
चिंता इसका बिल्कुल नहीं सताती है।
नीम का एक विरवा जो मै लगाऊँगा,
फल उसका पीढी दर पीढी पाऊँगा।
7th July, 2014
एक नीम अपने आगंन हो, होती है इच्छा सबकी,
कुछ की पूरी होती, रह जाती है कुछ की आधीअधूरी।
कलुआ जाटव का आंगन खाली है
एक पेड नीम का हो इच्छा भारी है।
विरवा होगा तो चिडियां भी आएंगीं,
जीवन की आशाएँ पूरी हो जाएंगी।
नीम नीचे खाट बिछा सोने में लगता अच्छा है,
नीदं आए गहरी और मजा खूब आता है।
उधार किस किस का कब कब देना है,
चिंता इसका बिल्कुल नहीं सताती है।
नीम का एक विरवा जो मै लगाऊँगा,
फल उसका पीढी दर पीढी पाऊँगा।
— with Ram Saran Singh and 44 others.

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