Saturday, July 12, 2014

हिंदी

कलम से _ _ _ _ _

24th June2014

आशीष तिवारी जी से प्रेरित होकर:-

बचपन से ही मैने हिन्दुस्तान अखबार पढा है। शुरुआत में हिंदी में और बडे होने पर इंग्लिश में।

आजकल भी हमारे यहां अग्रेजी का अखबार ही आता है। इसका वजन दिन के हिसाब से घटता या बढता रहता है।

इतवार के दिन तो इसका वजन भी ठीक ठाक रहता है साथ में एक पुछल्ला भी लगा रहता है। उसे ब्रंच कहते हैं।

आजकल के हिसाब से मैटीरियल इसमें ठीक ठाक होता है।

पिछले सनडे के साथ जो ब्रंच आया था उसके एक आरटीकल में ' The Finest Indian. Novels ' का जिक्र था।

मेरे स्वभाव के अनुसार मैने यह आरटीकल पढा। ताज्जुब इस बात का था कि इंग्लिश भाषा में लिखने वाले लोगों के कार्य का तो जिक्र मिला परंतु हिंदी भाषा में लिखने वालों का कहीं नाम नहीं था।

अंग्रेजी भाषा थोडी बहुत पढ लेता हूँ और लिख इतनी लेता हूँ कि अपना काम चले। भारत सरकार की नौकरी करी है वहीं से सेवानिवृत मिली है तो यह माना जा सकता है कि इंग्लिश का ज्ञान काम चलाने भर के लिए ठीक होगा।

मै बचपन से ही हिंदी में सोचता हूँ और फिर आवश्यकतानुसार अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करता हूं। मेरे विचार में अधिकांश हिंदीदां लोग यही करते हैं।

ताज्जुब इसका होता है कि यही लोगां सबसे ज्यादा अंग्रेजी के हक में बोलते हैं।

हम लोगों को हिंदी भी काम चलाने वाली आती है उसी से काम चला लेते हैं।

हिंदी वाले लोग कम से काम हिंदी में करें तो खुशी होगी।

कविता तो हिंदी में ही लिखी पढी जाती है।

धन्यवाद।
 — with Ram Saran Singh and 8 others.
Photo: कलम से _ _ _ _ _

24th June2014

आशीष तिवारी जी से प्रेरित होकर:-

बचपन से ही मैने हिन्दुस्तान अखबार पढा है। शुरुआत में हिंदी में और बडे होने पर इंग्लिश में।

आजकल भी हमारे यहां अग्रेजी का अखबार ही आता है। इसका वजन दिन के हिसाब से घटता या बढता रहता है।

इतवार के दिन तो इसका वजन भी ठीक ठाक रहता है साथ में एक पुछल्ला भी लगा रहता है। उसे ब्रंच कहते हैं।

आजकल के हिसाब से मैटीरियल इसमें ठीक ठाक होता है।

पिछले सनडे के साथ जो ब्रंच आया था उसके एक आरटीकल में ' The Finest Indian. Novels ' का जिक्र था।

मेरे स्वभाव के अनुसार मैने यह आरटीकल पढा। ताज्जुब इस बात का था कि इंग्लिश भाषा में लिखने वाले लोगों के कार्य का तो जिक्र मिला परंतु हिंदी भाषा में लिखने वालों का कहीं नाम नहीं था।

अंग्रेजी भाषा थोडी बहुत पढ लेता हूँ और लिख इतनी लेता हूँ कि अपना काम चले। भारत सरकार की नौकरी करी है वहीं से सेवानिवृत मिली है तो यह माना जा सकता है कि इंग्लिश का ज्ञान काम चलाने भर के लिए ठीक होगा।

मै बचपन से ही हिंदी में सोचता हूँ और फिर आवश्यकतानुसार अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करता हूं। मेरे विचार में अधिकांश हिंदीदां लोग यही करते हैं।

ताज्जुब इसका होता है कि यही लोगां सबसे ज्यादा अंग्रेजी के हक में बोलते हैं।

हम लोगों को हिंदी भी काम चलाने वाली आती है उसी से काम चला लेते हैं।

हिंदी वाले लोग कम से काम हिंदी में करें तो खुशी होगी।

कविता तो हिंदी में ही लिखी पढी जाती है।

धन्यवाद।
  • Ram Saran Singh महोदय, जो कुछ आपने लिखा है वह आइने की तरह शफ्फाफ है । इस साफ़गोई के लिए आपकी जितनी सराहना की जाए कम है । भावाभिव्यक्ति में भाषा आड़े नहीं आनी चाहिए । धन्यवाद ।
  • S.p. Singh अगर इतना ही हो जाय तो हम सभी तरक्की करेंगें और साथ में वह सब भाषायें जिनसे हम जुडे हुए हैं।
    बहुत बहुत धन्यवाद।
  • BN Pandey SIR MAINE DEKHA HAI DESH KE KISI BHI KONE ME RAHANE WALA BHARAT BASI CHAAHE JIS BHI BHASHAA ME BAAT KARATA HO....HINDI N BOLANE AUR SAMAJHANE KI NAUTANKI JAROOR KARATA HAI LEKIN SAALA JUB WAHI HINDI FILMO KE " DIALOGUE AUR GAANE" KI BAAT AATI HAI SUBASE PAHALE KUDATA HAI. CHAHE WAH KISI STATE KA HO..........APANI .. HINDI SUNDER AUR TIKAAU HAI. SARAL SHABD PRAYOG HONE CHAAHIYE
  • S.p. Singh बहुत खूब।बहुत बढिया है।
  • UN Tripathi · Friends with Ram Saran Singh
    दरअसल हिंदी के अच्‍छे जानकार भी निखालिस हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं । मानसिकता यह हो गई है कि जब तक अंगरेजी का प्रयोग लाेग नहीं कर लेते हैं तब तक उन्‍हें लगता है कि कहीं बहुत बडी चूक हो रही है जबकि वास्‍तविका यही है कि अधिकांश हिन्‍दीभाषी लोग जब अंगरेजी लिखते या बोलते हैं तो पहले हिंदी में ही सोचकर लिख्‍ाते एवं बोलते हैं लेकिन यही तबका अंगरेजी ज्‍यादा बोलकर यह दिखाने का प्रयास करता है कि उसे अंगरेजी में बोलने या काम करने में ज्‍यादा आसानी होती है । लोग तो अपने पालतू जानवरों से भी अंगरेजी में बितियाते मिल जाएंगे । आपके विचार पूर्णतया यथार्थ हैं ।
  • S.p. Singh सुदंर संदेश निहित है आपकी टिप्पणियों में।
  • आशीष कैलाश तिवारी कम्पलीटली एग्री विद 'यू' सर। (यह 'यू', सम्माननीय नहीं लगता है ये बात मैं हिन्दी में कहता तो 'आप' का उपयोग करता जो हमारी संस्कृती है)See Translation
  • Sp Tripathi हिन्दी एवं संस्कृत दोनों भाषाओं कि वास्तविकता का ज्ञान मुझे ग्यारहवी क्लास मे ही हो गया था । मेरे अंग्रेज़ी के टीचर ने भरे क्लास में उन बच्चों को खड़ा होने को कहा जिनके पिता संस्कृत विश्वविद्यालय में अध्यापन मे कार्यरत थे । ६ बच्चे खड़े हो गए । इसके बाद उन्होंने कहा कि मैं हर वर्ष यह कार्य करता हूँ और इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि संस्कृत विश्वविद्यालय का हर अध्यापक अपने बच्चों को केवल विज्ञान विषय ही पढ़ाता है ।। वह अपने बच्चों को Queen's College /BHU ही भेजता है । तभी तो हम हिन्दी में सोचते है और अंग्रेज़ी में बोलते है । हम ग़ुस्से में अंग्रेज़ी ज़रूर बोलते है ।।See Translation
  • S.p. Singh हम लोग अग्रेजी नशे की हालत में भी कुछ ज्यादा बोलते हैं।
  • आशीष कैलाश तिवारी हॉ हॉ हॉ हॉ,,, सर। उस मूड में 'भी' नहीं,,, 'ही'!!!See Translation
  • S.p. Singh You are an exception please.
  • आशीष कैलाश तिवारी हॉ हॉ हॉ.. हाऊ यू क्नो दिस टाप सीक्रेट कन्डीशन सर?See Translation
  • S.p. Singh When I am so close to you if I will not know then who else will?
  • आशीष कैलाश तिवारी टोटल्ली राइट कह रहे हैं सर।See Translation

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