Saturday, July 12, 2014

बूँद

कलम से _ _ _ _

(आज बस अभी अभी )

24th June, 2014

बूंद बन बरस,
बूंद सीप में गिरे, मोती बने,
बूंद कपोल से ढले, अश्रु बने,
बूंद बूंद कर गिरे, बूंद बूंद को तरसे।

बूंद आस बन गिरे, फसल तब उगे,
बूंद ठहर जाय अगर तो हाहाकार मचे।

बूंद ठहर न बरस न गरज,
देख लूं तुझे तब तू बरस,
बरसे आकाश से तू मिस्ठी बन,
नमकीन है जब गिरे है अश्रु बन।
 — with Ram Saran Singh and 43 others.
Photo: कलम से _ _ _ _

(आज बस अभी अभी )

24th June, 2014 

बूंद बन बरस,
बूंद सीप में गिरे, मोती बने,
बूंद कपोल से ढले, अश्रु बने,
बूंद बूंद कर गिरे, बूंद बूंद को तरसे।

बूंद आस बन गिरे, फसल तब उगे, 
बूंद ठहर जाय अगर तो हाहाकार मचे।

बूंद ठहर न बरस न गरज,
देख लूं तुझे तब तू बरस,
बरसे आकाश से तू मिस्ठी बन,
नमकीन है जब गिरे है अश्रु बन।

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