कलम से _ _ _ _
28th June 2014
तुम न आए आज भी,
नैन बिछाए रहा मैं वैठा
फिर भी न आए तुम।
मिलन की पहली रात का
बारिश की पहली बूंद का
रहता है इंतजार
करते हो क्यों निराश
आज भी न आए तुम।
धनधोर घटा छाई थी
आस बहुत जगाई थी
बरसोगे अबके जोरदार
बिजली आसमान में कडक रही थी
हवाओं के झोकों के साथ बह गए
लौट फिर न आए
आज न आए तुम।
आना खूब बरसना
कोई न दे उलाहना
ऐसे अपने हो बरसना
शातं हो जाए धरा
तब तक बरसना
पेड पोधों को
सूखी दूब को
पशुओं को
पक्षियों को
मोर मोरनी को
कोयल को न मिल जाए आवाज
तब तक बरसना।
उमस भरी शाम में
कोई नहीं आता
ऐसा मौसम नहीं किसी को सुहाता
मौसम सुहावना होगा
मतबाली हवाएं बह रही होंगीं
तब आएगा मेरा यार
इसलिए कहता हूँ
बरस जोर से बरस मेरे यार। — with Ram Saran Singh and 14 others.
28th June 2014
तुम न आए आज भी,
नैन बिछाए रहा मैं वैठा
फिर भी न आए तुम।
मिलन की पहली रात का
बारिश की पहली बूंद का
रहता है इंतजार
करते हो क्यों निराश
आज भी न आए तुम।
धनधोर घटा छाई थी
आस बहुत जगाई थी
बरसोगे अबके जोरदार
बिजली आसमान में कडक रही थी
हवाओं के झोकों के साथ बह गए
लौट फिर न आए
आज न आए तुम।
आना खूब बरसना
कोई न दे उलाहना
ऐसे अपने हो बरसना
शातं हो जाए धरा
तब तक बरसना
पेड पोधों को
सूखी दूब को
पशुओं को
पक्षियों को
मोर मोरनी को
कोयल को न मिल जाए आवाज
तब तक बरसना।
उमस भरी शाम में
कोई नहीं आता
ऐसा मौसम नहीं किसी को सुहाता
मौसम सुहावना होगा
मतबाली हवाएं बह रही होंगीं
तब आएगा मेरा यार
इसलिए कहता हूँ
बरस जोर से बरस मेरे यार। — with Ram Saran Singh and 14 others.

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