कलम से _ _ _ _
5th July, 2014
वेदना,
सन्धि विच्छेद कर देखो बनता है क्या,
वेद+ना,
जिसके घर में आवास निवास नहीं है,
वेदों का,
बनी रहती है हमेशा कलह की वेदना,
दूर करना है तो अतंस की करो विवेचना,
सम्पूर्ण कष्ट कटेगें रहेगा कोई प्रश्न शेष ना,
सुखी मन होगा जब होगा मिलना जुलना।
घर घर प्राण प्राण बसती है पल पल की वेदना,
कुछ ऐसा कर प्राणी तू अब मिट जाए यह वेदना,
रख अपने घर चारों वेद कर उनका पठन पाठन,
देख चमत्कार प्रभु का मिट जाऐगी तेरी वेदना।
— with आशीष कैलाश तिवारी and47 others.
5th July, 2014
वेदना,
सन्धि विच्छेद कर देखो बनता है क्या,
वेद+ना,
जिसके घर में आवास निवास नहीं है,
वेदों का,
बनी रहती है हमेशा कलह की वेदना,
दूर करना है तो अतंस की करो विवेचना,
सम्पूर्ण कष्ट कटेगें रहेगा कोई प्रश्न शेष ना,
सुखी मन होगा जब होगा मिलना जुलना।
घर घर प्राण प्राण बसती है पल पल की वेदना,
कुछ ऐसा कर प्राणी तू अब मिट जाए यह वेदना,
रख अपने घर चारों वेद कर उनका पठन पाठन,
देख चमत्कार प्रभु का मिट जाऐगी तेरी वेदना।
— with आशीष कैलाश तिवारी and47 others.

No comments:
Post a Comment