कलम से _ _ _ _
6th July, 2014
अच्छा किया पिया तुमने,
मुझे सोते से जगा दिया,
कह कर यह,
एक पाती प्यार की जरा लिखो तो पिया।
अरसा हुआ, जब प्रेम पत्र लिखते थे,
प्यार में हम जब बिल्कुल नये नये थे,
चलो, तुम्हारे कहने का मान रखता हूँ,
आज, मैं अपने दिल की बात कहता हूँ।
अजीब से कुछ, वो दिन हुआ करते थे,
आराम से कट जांए, ऐसे कहां हुआ करते थे,
कभी इधर तो, कभी उधर हुआ करते थे,
बिस्तर बस आँसुओं से भीगे रहा करते थे।
तुमने मेरे घर आकर, आगंन मेरा है महकाया,
उसी समय से ही मेरा जीवन है चहकाया,
अब तो तुम्हारी चूडियां खनकतीं हैं,
कानों को सुदंर, मुझे बहुत मन भाती हैं।
आने से ही तुम्हारे, जीवन में बहार आई है,
आगंन की बगिया में रातरानी खिली हुई है,
खुशबू चारों दिशाओं में जो है, समा गई है,
आसपास रहे तू, दिल की सदा बस यही है।
देखो, प्रेम पत्र की भाषा कुछ बदल गई है,
जीवन के अहसासों की मिठास घुली हुई है,
पल बीते हैं जैसे, हम एक दूजे के और बने हैं,
आने वाले दिनों के स्वप्न, रगीनं और हुए हैं।
चलेंगे दिन एक वहां, मिलते धरती आकाश जहा,
रहेगें मिलजुल एक साथ, जैसे रहते हैं हम यहाँ,
जीवन सुदंर होगा ही वहां, मिलते हैं दो प्राण जहां,
चादं चाँदनी आपस में, हंस खेलें आखं मिचौली जहां।
अच्छा किया पिया तुमने मुझे, सोते से जगा दिया,
आलिंगनपाश में जकड, मुझे यूंही निढाल किया।
6th July, 2014
अच्छा किया पिया तुमने,
मुझे सोते से जगा दिया,
कह कर यह,
एक पाती प्यार की जरा लिखो तो पिया।
अरसा हुआ, जब प्रेम पत्र लिखते थे,
प्यार में हम जब बिल्कुल नये नये थे,
चलो, तुम्हारे कहने का मान रखता हूँ,
आज, मैं अपने दिल की बात कहता हूँ।
अजीब से कुछ, वो दिन हुआ करते थे,
आराम से कट जांए, ऐसे कहां हुआ करते थे,
कभी इधर तो, कभी उधर हुआ करते थे,
बिस्तर बस आँसुओं से भीगे रहा करते थे।
तुमने मेरे घर आकर, आगंन मेरा है महकाया,
उसी समय से ही मेरा जीवन है चहकाया,
अब तो तुम्हारी चूडियां खनकतीं हैं,
कानों को सुदंर, मुझे बहुत मन भाती हैं।
आने से ही तुम्हारे, जीवन में बहार आई है,
आगंन की बगिया में रातरानी खिली हुई है,
खुशबू चारों दिशाओं में जो है, समा गई है,
आसपास रहे तू, दिल की सदा बस यही है।
देखो, प्रेम पत्र की भाषा कुछ बदल गई है,
जीवन के अहसासों की मिठास घुली हुई है,
पल बीते हैं जैसे, हम एक दूजे के और बने हैं,
आने वाले दिनों के स्वप्न, रगीनं और हुए हैं।
चलेंगे दिन एक वहां, मिलते धरती आकाश जहा,
रहेगें मिलजुल एक साथ, जैसे रहते हैं हम यहाँ,
जीवन सुदंर होगा ही वहां, मिलते हैं दो प्राण जहां,
चादं चाँदनी आपस में, हंस खेलें आखं मिचौली जहां।
अच्छा किया पिया तुमने मुझे, सोते से जगा दिया,
आलिंगनपाश में जकड, मुझे यूंही निढाल किया।
— with Ram Saran Singh and 45 others.

No comments:
Post a Comment