Friday, July 11, 2014

इतिहास

कलम से _ _ _ _

2nd July, 2014

जान पहचान के एक सज्जन बहुत दिन बाद मिले,
मैने उनसे पूछा कहां चले गए थे,
कहने लगे इतिहास ढूढं रहा था,
कौतूहल वश मैने पूछा वह कैसे,
कहा उन्होंने पाकिस्तान गया था।

कुछ लोगों का सबकुछ छूट गया था,
रिश्ता टूट गया था,
अपनों में, पराया सा हो गया था,
रोते रोते, आखों के आगे मैं खो गया था।

जो खो गया था,
ढूँढने उसी को मै गया था,
इतिहास हमारा वहीं रह गया था,
अजनबी हो गए थे,
अपनों के ही बीच खो गए थे।

पावं जमाने में दुबारा वक्त बहुत लगता है,
जिदंगी के हर छूटे पल को पकडना पडता है,
अपनों में से अपनों को ही ढूंढना पडता है,
इतिहास नए सिरे से लिखना पडता है।




  • Ramesh Chandra Experience nicely narrated. Ek achchhi Rachana
  • BN Pandey BAHUT UMDAA......SIR YE RACHANA PAKISTAAN SE VISHTHAAPIT UN BHAIYO KO SAPARPIT HAI JINKA SUB KUCHH WAHI CHHUT GAYA THA..............." BICHHAR KE TUMSE DILE BEKARAAR ROTAA HAI, WAFAA TARAPATI HAI SABRO KARAAR ROTA HAI. WO ! BICHHARANE WALE TUJHE KYAA KHABER KI, TERE LIYE KYO KOI BE- IKHATIYAAR ROTAA HAI..............TU AA JAAYE TO MERE DIL KO SUKUN AA JAAYE TERAA TO KARKE KOI INTZAAR ROTAA HAI...............
  • S.p. Singh बहुत खूब।
  • Ram Saran Singh मेरे विचार से इतिहास सुखद और दुखद दोनों ही होता है । सत्कर्म और दुष्कर्म दोनों का साक्षी इतिहास ही होता है । इतिहास की बुनियाद पर भावी प्रासाद का निर्माण होता है । अपने और पराए सब इतिहास के पन्ने बन जाते हैं और फिर बिखरी यादों से नव निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है । बहुत ही बढ़िया चिंतन है महोदय आपका ।
  • S.p. Singh सिंह साहब बस last train to Pakistan का ख्याल आया मन किया वह किरदार आज जिया जाए।
    और यह रचना स्वतः बन गई।
    आपके विचारों का स्वागत करता हूँ।
    धन्यवाद।
  • Javed Usmani माटी से बिछोह का दर्द हर किसी को सलता हैSee Translation
  • S.p. Singh शुक्रिया आपका जावेद भाई।
  • S.p. Singh धन्यवाद मित्रों।
  • Puneet Chowdhary Marvellous piece of poetry
  • Puneet Chowdhary Shayari ko shayar ne aapne salike se kaha hai
  • Madhvi Srivastava Too good,......
  • SN Gupta खूबसूरत जहां
  • Rajan Varma हमारे पिताश्री मुलतान (पाकिस्तान) से १९४७ में हिंदुस्तान में विस्थापित हुये थे- उनके मुख़ारविंद से सैकड़ो बार रोंये खड़े कर देने वाले दर्दनाक, पाश्विक, मार्मिक गाथाऐं सुनते थे- कैसे वे शवोें से परिपूर्ण रेल में ठुँसे आटारी (हिंदुस्तान का बार्डर) पहुँचे थे; 'इतिहास नये सिरे से लिखना पड़ता है'- य़थार्थ कहा आपने सर- क्योंकि ज़िन्दगी एक निरंतर, कभी न रूकने वाला सफ़र है, किसी का इंतज़ार नहीं करता- आगे बढ़ जाता है; साथ नहीं चलेंगे तो खुद इतिहास बन जायेंगे
  • S.p. Singh राजन जी नहीं जानता था कि आपका परिवार विभाजन की पीडा झेल चुका है। मैने वह परिवेश वर्तमान में जीने की कोशिश की है।
    इसीलिए मैंने इसे इतिहास स्वरूप देखा है।
    आपसे जुड सका मुझे अच्छा लगा।
  • Narendera Pal Singh Purani baten yad kar ke takleef baut hoti hai .Mere fater ,Grand father ne bhi patisition ki problem dekhi hai.
  • Anil K Garg Beautiful Sir...
  • Ishwar Dass I visited PAK in APRIL to feel the problem faced by our families and to our roots
  • Ishwar Dass see our roots
  • S.p. Singh You were in my thoughts as I knew that you had gone to Pakistan a few months ago.
  • Baba Deen · Friends with Bagga Sk and 19 others
    VERY NICE
  • Satya Nand Tripathi · 40 mutual friends
    Sir, It seems you have change morally.
  • Bhawesh Asthana बहुत सुंदर

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