कलम से----
मचान पर आ गए हम यह सोचकर,
बदरा बरसें खूब बरसें,
हम न भीगेंगे इस बरसात में,
हम तो पहले से भीगे हैं उनके प्यार में। — with Ram Saran Singh and 31 others.
मचान पर आ गए हम यह सोचकर,
बदरा बरसें खूब बरसें,
हम न भीगेंगे इस बरसात में,
हम तो पहले से भीगे हैं उनके प्यार में। — with Ram Saran Singh and 31 others.


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