कलम से---"'
22nd May, 2014
Camp: The Castle Naggar, Himanchal
Location Rohtang Pass
दांत कटाकटाती सर्दी,
तेज हवाओं के झोंके,
ठिठुरते बदन,
नीले पडते होठों की दास्तान,
बच्चों की आखों से टपकते आसूं,
कारों का लम्बा काफिला,
नीचे से ऊपर आती गाडियों की भीड,
हर आने बाला बडी उम्मीद से आ रहा है,
जीवन मे पहली बार,
वह बर्फ से ढके पहाड,
करीब से देखेगा,
उस पर चलेगा,
फिसलेगा उठेगा और फिर गिरेगा,
बच्चों से बर्फ के गोलों से खेलेगा,
बचपन के दिन कुछ को छुएगा और कुछ को जी लेगा।
सब आशायें टूट गयी,
सपने थे बिखर गये,
मंजिल दूर ही नहीं,
बहुत दूर चली गई।
अचानक मौसम ने करवट बदली,
तेज हवाएं चलने लगी,
सर्दी बेपनाह बढने लगी,
तूफान सा हो गया पूरा माहौल,
सैलानी थे परेशान बहुत,
कुछ लौट गये आधे रस्ते से,
कुछ लौटे मंजिल के करीब से,
सपने अध कचरे से,
सपने ही रह गये।
रोहतांग पास का सपना,
पास आके टूट गया,
सपना सपना ही रह गया।
सलाह उन सैलानियों को,
करलो जांच पढताल मौसम की नैट पर,
निकल पडो पडाव से सुबह सुबह तीन बजे,
तभी ले पाओगे मजे बर्फीले पहाड के,
वरना बीच से ही लौट आओगे निराश हताश से। — with आशीष कैलाश तिवारी and 43 others. (4 photos)
22nd May, 2014
Camp: The Castle Naggar, Himanchal
Location Rohtang Pass
दांत कटाकटाती सर्दी,
तेज हवाओं के झोंके,
ठिठुरते बदन,
नीले पडते होठों की दास्तान,
बच्चों की आखों से टपकते आसूं,
कारों का लम्बा काफिला,
नीचे से ऊपर आती गाडियों की भीड,
हर आने बाला बडी उम्मीद से आ रहा है,
जीवन मे पहली बार,
वह बर्फ से ढके पहाड,
करीब से देखेगा,
उस पर चलेगा,
फिसलेगा उठेगा और फिर गिरेगा,
बच्चों से बर्फ के गोलों से खेलेगा,
बचपन के दिन कुछ को छुएगा और कुछ को जी लेगा।
सब आशायें टूट गयी,
सपने थे बिखर गये,
मंजिल दूर ही नहीं,
बहुत दूर चली गई।
अचानक मौसम ने करवट बदली,
तेज हवाएं चलने लगी,
सर्दी बेपनाह बढने लगी,
तूफान सा हो गया पूरा माहौल,
सैलानी थे परेशान बहुत,
कुछ लौट गये आधे रस्ते से,
कुछ लौटे मंजिल के करीब से,
सपने अध कचरे से,
सपने ही रह गये।
रोहतांग पास का सपना,
पास आके टूट गया,
सपना सपना ही रह गया।
सलाह उन सैलानियों को,
करलो जांच पढताल मौसम की नैट पर,
निकल पडो पडाव से सुबह सुबह तीन बजे,
तभी ले पाओगे मजे बर्फीले पहाड के,
वरना बीच से ही लौट आओगे निराश हताश से। — with आशीष कैलाश तिवारी and 43 others. (4 photos)




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