कलम से _ _ _ _
29th June, 2014
चित्रकार ने सतरंगी
रंगो से एक चित्र बनाया
वह भी केवल
मात्र दो मिनट में।
रोक न पाया
गया उसके पास मैं
पूछा क्या है उसने बनाया
बुझे मन से
कहने लगा वह
नहीं आज कुछ नहीं बन पाया
मेरा महबूब आने को था
नहीं वो आया
मन अशांत था इसलिए
आज कैनवास पर
कुछ नहीं बनाया
रंग बिखेर दिए हैं बस ऐसे ही
मन बहलाने को।
उदास मन को सहारा मिल जाए
कुछ मैने सोचा था
दिल उसका रखने को
बहुत सुंदर पेन्टिंग है बनी
ऐसा ही कहा था।
कुछ लोग और आगए
भीड सी थी लग गई
हर व्यक्ति गुणी ज्ञानी था
अपनी अपनी टिप्पणी दे रहा था।
कहता कोई कितना सुंदर लैंडस्केप बन पडा
कोई कहता नहीं नहीं क्या सुंदर स्त्री का गठन किया
एक सज्जन बोले नहीं इसमें मेरा परिवार बसा
एक हमसार बोला ऐसा कुछ नहीं इसमें मेरा कृष्ण बसा
सुनकर बात इतनी सी
दे दी पेन्टिंग उसको जिसने कृष्ण को देखा पहचाना था
निकला मुहं से उसके
सही उसने आकां था।
"जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।" — with Ram Saran Singh and 45 others.
29th June, 2014
चित्रकार ने सतरंगी
रंगो से एक चित्र बनाया
वह भी केवल
मात्र दो मिनट में।
रोक न पाया
गया उसके पास मैं
पूछा क्या है उसने बनाया
बुझे मन से
कहने लगा वह
नहीं आज कुछ नहीं बन पाया
मेरा महबूब आने को था
नहीं वो आया
मन अशांत था इसलिए
आज कैनवास पर
कुछ नहीं बनाया
रंग बिखेर दिए हैं बस ऐसे ही
मन बहलाने को।
उदास मन को सहारा मिल जाए
कुछ मैने सोचा था
दिल उसका रखने को
बहुत सुंदर पेन्टिंग है बनी
ऐसा ही कहा था।
कुछ लोग और आगए
भीड सी थी लग गई
हर व्यक्ति गुणी ज्ञानी था
अपनी अपनी टिप्पणी दे रहा था।
कहता कोई कितना सुंदर लैंडस्केप बन पडा
कोई कहता नहीं नहीं क्या सुंदर स्त्री का गठन किया
एक सज्जन बोले नहीं इसमें मेरा परिवार बसा
एक हमसार बोला ऐसा कुछ नहीं इसमें मेरा कृष्ण बसा
सुनकर बात इतनी सी
दे दी पेन्टिंग उसको जिसने कृष्ण को देखा पहचाना था
निकला मुहं से उसके
सही उसने आकां था।
"जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।" — with Ram Saran Singh and 45 others.

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