Friday, July 11, 2014

विश्व पर्यावरण दिवस

कलम से-----

5th June,2014

विश्व पर्यावरण दिवस

आज मनाऐगें हम अपनी बदहाली का शोक,
छोड जा नहीं रहे है हम कुछ ऐसे अवशेष,
जिस पर नाज करे आने वाली पीढी,
खेल रहे है खेल जिस पर चढे न कोई सीढी,
हो रहा हर जगह विनाश है,
ऐसे में कैसे होगी सृजन की बात,
नजर जहां तक जाती है दीखे अंधकार है,
प्रगति की आंधी में दिखता है विनाश,
आज मनाएंगे हम अपनी बदहाली का शोक।

हरियाली को समाप्त कर रहे हम,
दम भरते दुनियां में हम सुदंर 'ग्रीन' हैं
पूर्वज हमारे छोड गऐ बहुत कुछ थे,
करते जिस पर हम नाज थे,
नहीं बचेगा अब कुछ बच्चों के लिए,
देख जिसे वह गौरवान्वित महसूस करें,
आज मनाएंगे हमे अपनी बदहाली का शोक।

जब जगंल ही न बचेंगें कैसे होगा मगंल,
शेर चीते हाथी मोर पंझी सब शोक मनाऐगें।

मछली रानी भी आसूं खूब बहाऐगी,
परियों की रानी कहानी किसे सुनाएगी।

चिन्तन मनन होगा,
सभागार भरे रहेगें,
लंबी चौडी बातें होंगी,
भविष्य में क्या होना है,
चर्चाएं दिन भर होंगी,
होगी न कोई मतलब की बात।

आखिर में एक रिजोल्यूशन रखा जाएगा,
ध्वनिमति से पास जिसे किया जाएगा,
बस ऐसे ही कुछ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा।

इन सब कर्मों से कया हम पर्यावरण बचा पाएंगे,
प्रश्न बहुत गहन है अंधे बन हम क्या दूजे को राह दिखा पाएगें।

बस आज हम सब मिल कर,
विश्व पर्यावरण दिवस मनाएंगे।
 — with आशीष कैलाश तिवारी and 39 others. (5 photos)
  • Sudhir Mohan बहुत ही सुंदर रचना हे।See Translation
  • S.p. Singh Wake up to awakening. Environment preservation is the need of the hour. Celebrate world environment day today by planting a sapling and feed water.
  • Prem Prakash Goswami हरियाली को समाप्त कर रहे हम,
    दम भरते दुनियां में हम सुदंर 'ग्रीन' हैं
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  • Arun Kumar Singh अति सुंदर है
  • Ram Saran Singh कविता में वर्तमान को बचाने की चाहत और भविष्य को हराभरा रखने की ललक झलक रही है । सशक्त संदेश है । धन्यवाद ।
  • Ajay Jain Good Mornin g Mitro
  • Himanshu Mahla आज ज़रूरत है पुनः स्वयं को माँ-प्रकृति से जोड़ने की, नवीन पीढी को उससे परिचित करवाने की | परिचय को धीरे-धीरे प्रगाढ़ मैत्री में तब्दील करने की | वापस उसी दुनिया में लौट जाने की जहाँ अमराइयाँ थीं, पेड़ थे, झाड़ियाँ थीं, सकोरे थे, सुराहियाँ थीं, छतों पर बिस्तर थे, आसमान में ध्रुव तारा था, सप्त-ऋषि मंडल था,,,,यानि हम कितने करीब थे प्रकृति के |,,,,,,happy World Environment Day,,,,,, See Translation
  • Javed Usmani "आखिर में एक रिजोल्यूशन रखा जाएगा,
    ध्वनिमति से पास जिसे किया जाएगा, 
    पर्यावरण चिंता की सही तस्वीर
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  • S.p. Singh सुदंर संदेश निहित है आपकी टिप्पणियों में। आपको भी इस त्योहार की बधाई। बहुत धन्यवाद।
  • Veena Madan · Friends with Sneh Lata Madan and 1 other
    Let us do our small endeavours. Beautiful thought.
  • S.p. Singh बूंद से बूंद से भरे सरोवर। सब अगर कोशिश करेंगे तो बात बन ही जाएगी।
  • Girijalaya Joshi · Friends with Pratap Singh
    AB EK HI SHAARA "SAGHAN-VRIKSHA ROPAN "--"VRIKSH EK LAGAKAR DHARTI KO SWARG BANAAYEN SHRISTI SANKAT KA YAH SANDESH GAON-SAHAR PAHUNCHAYE @ GIRIWAR @
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  • Girijalaya Joshi · Friends with Pratap Singh
    BAHUT SUNDER & PRABHAVEE VICHAAR HAIN AWASYA NAI KRANTI AAYEGI
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