कलम से-----
5th June,2014
विश्व पर्यावरण दिवस
आज मनाऐगें हम अपनी बदहाली का शोक,
छोड जा नहीं रहे है हम कुछ ऐसे अवशेष,
जिस पर नाज करे आने वाली पीढी,
खेल रहे है खेल जिस पर चढे न कोई सीढी,
हो रहा हर जगह विनाश है,
ऐसे में कैसे होगी सृजन की बात,
नजर जहां तक जाती है दीखे अंधकार है,
प्रगति की आंधी में दिखता है विनाश,
आज मनाएंगे हम अपनी बदहाली का शोक।
हरियाली को समाप्त कर रहे हम,
दम भरते दुनियां में हम सुदंर 'ग्रीन' हैं
पूर्वज हमारे छोड गऐ बहुत कुछ थे,
करते जिस पर हम नाज थे,
नहीं बचेगा अब कुछ बच्चों के लिए,
देख जिसे वह गौरवान्वित महसूस करें,
आज मनाएंगे हमे अपनी बदहाली का शोक।
जब जगंल ही न बचेंगें कैसे होगा मगंल,
शेर चीते हाथी मोर पंझी सब शोक मनाऐगें।
मछली रानी भी आसूं खूब बहाऐगी,
परियों की रानी कहानी किसे सुनाएगी।
चिन्तन मनन होगा,
सभागार भरे रहेगें,
लंबी चौडी बातें होंगी,
भविष्य में क्या होना है,
चर्चाएं दिन भर होंगी,
होगी न कोई मतलब की बात।
आखिर में एक रिजोल्यूशन रखा जाएगा,
ध्वनिमति से पास जिसे किया जाएगा,
बस ऐसे ही कुछ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा।
इन सब कर्मों से कया हम पर्यावरण बचा पाएंगे,
प्रश्न बहुत गहन है अंधे बन हम क्या दूजे को राह दिखा पाएगें।
बस आज हम सब मिल कर,
विश्व पर्यावरण दिवस मनाएंगे। — with आशीष कैलाश तिवारी and 39 others. (5 photos)
5th June,2014
विश्व पर्यावरण दिवस
आज मनाऐगें हम अपनी बदहाली का शोक,
छोड जा नहीं रहे है हम कुछ ऐसे अवशेष,
जिस पर नाज करे आने वाली पीढी,
खेल रहे है खेल जिस पर चढे न कोई सीढी,
हो रहा हर जगह विनाश है,
ऐसे में कैसे होगी सृजन की बात,
नजर जहां तक जाती है दीखे अंधकार है,
प्रगति की आंधी में दिखता है विनाश,
आज मनाएंगे हम अपनी बदहाली का शोक।
हरियाली को समाप्त कर रहे हम,
दम भरते दुनियां में हम सुदंर 'ग्रीन' हैं
पूर्वज हमारे छोड गऐ बहुत कुछ थे,
करते जिस पर हम नाज थे,
नहीं बचेगा अब कुछ बच्चों के लिए,
देख जिसे वह गौरवान्वित महसूस करें,
आज मनाएंगे हमे अपनी बदहाली का शोक।
जब जगंल ही न बचेंगें कैसे होगा मगंल,
शेर चीते हाथी मोर पंझी सब शोक मनाऐगें।
मछली रानी भी आसूं खूब बहाऐगी,
परियों की रानी कहानी किसे सुनाएगी।
चिन्तन मनन होगा,
सभागार भरे रहेगें,
लंबी चौडी बातें होंगी,
भविष्य में क्या होना है,
चर्चाएं दिन भर होंगी,
होगी न कोई मतलब की बात।
आखिर में एक रिजोल्यूशन रखा जाएगा,
ध्वनिमति से पास जिसे किया जाएगा,
बस ऐसे ही कुछ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा।
इन सब कर्मों से कया हम पर्यावरण बचा पाएंगे,
प्रश्न बहुत गहन है अंधे बन हम क्या दूजे को राह दिखा पाएगें।
बस आज हम सब मिल कर,
विश्व पर्यावरण दिवस मनाएंगे। — with आशीष कैलाश तिवारी and 39 others. (5 photos)





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