कलम से _ _ _ _
12th July, 2014
हापुड के पापड,
तो खूब सुने होंगे।
पर यह न सुना होगा,
हत्थे चढते सट्टा होता,
राह चलते सट्टा होता,
बारिश को लेकर भी क्या सट्टा होता।
देखिए कैसे होता है।
आधे धंटे में बारिश होगी,
परनाला बह निकलेगा,
मेरे लगे सौ के ऊपर दो सौ,
ऐसा नहीं हुआ तो,
मेरे रहे सौ पर तीन सौ।
बस हो गया तय,
खेल हारजीत का,
जैसा होगा वैसा उसको मिलेगा,
होगी न कुताही किसी तरह की,
हुआ है तय, उतना अवश्य मिलेगा।
देखा भइय्या, खेल खेलने वालों ने है खेला,
दद्दा ने सुनाया किस्सा ऐसा होता है मेला,
मेल मिलाप का बहुत बडा रंगमंच यह है,
जीवन के उतार चढाव का सही मापदंड है।
पानी पर हस्ताक्षर कर किसी ने न बेचा होगा,
पानी पर तुमने अपना नाम कभी न लिखा होगा।
with आशीष कैलाश तिवारी and 8 others.
12th July, 2014
हापुड के पापड,
तो खूब सुने होंगे।
पर यह न सुना होगा,
हत्थे चढते सट्टा होता,
राह चलते सट्टा होता,
बारिश को लेकर भी क्या सट्टा होता।
देखिए कैसे होता है।
आधे धंटे में बारिश होगी,
परनाला बह निकलेगा,
मेरे लगे सौ के ऊपर दो सौ,
ऐसा नहीं हुआ तो,
मेरे रहे सौ पर तीन सौ।
बस हो गया तय,
खेल हारजीत का,
जैसा होगा वैसा उसको मिलेगा,
होगी न कुताही किसी तरह की,
हुआ है तय, उतना अवश्य मिलेगा।
देखा भइय्या, खेल खेलने वालों ने है खेला,
दद्दा ने सुनाया किस्सा ऐसा होता है मेला,
मेल मिलाप का बहुत बडा रंगमंच यह है,
जीवन के उतार चढाव का सही मापदंड है।
पानी पर हस्ताक्षर कर किसी ने न बेचा होगा,
पानी पर तुमने अपना नाम कभी न लिखा होगा।
with आशीष कैलाश तिवारी and 8 others.

No comments:
Post a Comment