कलम से_____
19th June, 2014
एक पंडित जी थे,
अपना खाना खुद बनाते थे,
सबसे पहले पूजा करते,
कृष्ण भगवान का भोग लगाते थे,
देखो भगवान की लीला,
बालरूप मे वो आकर,
पंडित जी का भोजन झूठा कर जाते थे,
देख झूठा भोजन पंडित जी लालपीले गुस्से में हो जाते थे,
फिर नहा धोके पंडित जी,
नये सिरे से खाना बनाते थे,
पूजा कर पंडित जी भोग लगाने भगवान को बुलाते थे,
कृष्ण आके भोग लगा चले जाते थे,
देख झूठा भोजन पंडित जी बहुत ही परेशान हो जाते थे ।
आखिर दया आई कृष्ण भगवान को,
दिए दिव्य दर्शन पंडित जी को और बोले,
खुद ही बुलाते और भूल जाते हो अपने ही स्वामी को,
मै ही तो वह हू तुम जिसे बुलाते
मान अपने भगवान को,
जाओ पाओ भोजन अपना
भोग लगाया मैंने ही उसको !
सुन गुणी बातें भगवान से
भर आए नयना पंडितजी के
माँगी क्षमा याचना पंडितजी ने
अपने मे छुपे अज्ञान की,
और बोले अब न होगी कभी भूल ऐसी कभी इस इनसान से ।
(यह कहानी बचपन में मेरी मां सुनाया करती थीं। सोचा इस कहानी को आपके समक्ष प्रस्तुत करूं।) — with आशीष कैलाश तिवारी and 39 others.
19th June, 2014
एक पंडित जी थे,
अपना खाना खुद बनाते थे,
सबसे पहले पूजा करते,
कृष्ण भगवान का भोग लगाते थे,
देखो भगवान की लीला,
बालरूप मे वो आकर,
पंडित जी का भोजन झूठा कर जाते थे,
देख झूठा भोजन पंडित जी लालपीले गुस्से में हो जाते थे,
फिर नहा धोके पंडित जी,
नये सिरे से खाना बनाते थे,
पूजा कर पंडित जी भोग लगाने भगवान को बुलाते थे,
कृष्ण आके भोग लगा चले जाते थे,
देख झूठा भोजन पंडित जी बहुत ही परेशान हो जाते थे ।
आखिर दया आई कृष्ण भगवान को,
दिए दिव्य दर्शन पंडित जी को और बोले,
खुद ही बुलाते और भूल जाते हो अपने ही स्वामी को,
मै ही तो वह हू तुम जिसे बुलाते
मान अपने भगवान को,
जाओ पाओ भोजन अपना
भोग लगाया मैंने ही उसको !
सुन गुणी बातें भगवान से
भर आए नयना पंडितजी के
माँगी क्षमा याचना पंडितजी ने
अपने मे छुपे अज्ञान की,
और बोले अब न होगी कभी भूल ऐसी कभी इस इनसान से ।
(यह कहानी बचपन में मेरी मां सुनाया करती थीं। सोचा इस कहानी को आपके समक्ष प्रस्तुत करूं।) — with आशीष कैलाश तिवारी and 39 others.

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