Saturday, July 12, 2014

बागबां

कलम से ------

फूल खिलते ही खरीदार आ जाते हैं,
बागबां के दिल को ठेस दे जाते हैं,
हर हसीन चेहरे की दास्तान निराली है,
दिल की सुनने को न मै, न तू राजी है।

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 — with आशीष कैलाश तिवारी and 36 others.
Photo: कलम से ------

फूल खिलते ही खरीदार आ जाते हैं, 
बागबां के दिल को ठेस दे जाते हैं, 
हर हसीन चेहरे की दास्तान निराली है,
दिल की सुनने को न मै, न तू राजी है।

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