कलम से-----
कौशांबी सेन्ट्रल पार्क से, आज प्रातः ही।
31st May, 2014
कल शाम की आंधी और तूफान पर रखता हूँ, मैं अपनी बात,
मैं, अंधा अंधड, तुमको अपनी बात बताता हूँ,
मुझे न समझो कमजोर मैं अपनी शक्ति दिखाता हूँ,
बहुत संदेश दिए प्रकृति से छेड छाड ठीक नहीं,
सुनी न तुमने मेरी बात, हो जाओ अब तैयार,
मैं अब आता, हूँ देखो क्या कर जाता हूँ,
पूजा होती थी मेरी, तुमने मारी मुझको लात,
सभंल जाओ अब तो तुम, वरना खाओ अब मेरी लात।
( Mother nature has been issuing warning but we human beings never cared so all this furry n destruction. ) — with आशीष कैलाश तिवारी and 42 others atKaushambi (Ghaziabad). (5 photos)
कौशांबी सेन्ट्रल पार्क से, आज प्रातः ही।
31st May, 2014
कल शाम की आंधी और तूफान पर रखता हूँ, मैं अपनी बात,
मैं, अंधा अंधड, तुमको अपनी बात बताता हूँ,
मुझे न समझो कमजोर मैं अपनी शक्ति दिखाता हूँ,
बहुत संदेश दिए प्रकृति से छेड छाड ठीक नहीं,
सुनी न तुमने मेरी बात, हो जाओ अब तैयार,
मैं अब आता, हूँ देखो क्या कर जाता हूँ,
पूजा होती थी मेरी, तुमने मारी मुझको लात,
सभंल जाओ अब तो तुम, वरना खाओ अब मेरी लात।
( Mother nature has been issuing warning but we human beings never cared so all this furry n destruction. ) — with आशीष कैलाश तिवारी and 42 others atKaushambi (Ghaziabad). (5 photos)





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