कलम से____
नंगे पाँव
तुम्हारे ही नहीं
हमारे भी हैं
पाँव में
छाले तुम्हारे ही नहीं
हमारे भी हैं
हम छुपाते फिरते हैं
कुछ दिखा के अफसाने बना देते हैं........
तुम्हारे ही नहीं
हमारे भी हैं
पाँव में
छाले तुम्हारे ही नहीं
हमारे भी हैं
हम छुपाते फिरते हैं
कुछ दिखा के अफसाने बना देते हैं........
//सुरेन्द्रपालसिंह © 2014//
No comments:
Post a Comment